एकात्मक मानववाद के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की धयेयनिष्ठा, राष्ट्रभक्ति, त्याग तथा कर्ममयी भावना को ही साकार स्वरुप प्रदान करने के उद्देश्य से श्री प्रकाश चंद्र जी (अखिल भारतीय संगठन मंत्री विद्याभारती) ने अपने सौम्य व्यवहार से समाज के गणमान्य नागरिको को इस पवित्र कार्य हेतु प्रेरित किया जिसके कारण विद्यालय की नींव पड़ी । कुछ राष्ट्र एवं समाज हितैषी महानुभावो ने विचार किया कि अपने भौतिक शरीर से वह महामानव इस संसार से विदा हो गया किन्तु मानवता की सेवा औऱ भावी पीढ़ी के संस्कार हेतु उसके आदर्श पल्लवित होते रहे, इस हेतु एक श्रेष्ठ संस्कारक्षम विद्यालय प्रारंभ किया जाए।